Tuesday, December 9, 2014

Suno



सुनो,
ज़रा गौर से अपनी पलकें झुकाना,
रात तो रात, दिन में भी आज कल अँधेरा है,
‘भरोसा’, एक बहरूपिया है,
ढल सको तो रंग जाओ ज़माने के रंग में,
तुम्हारे हाथ ही तुम्हारा दिन और तुम्हारा सवेरा है.


#Rape #SelfResponsibility #SelfSecurity #StayAlert